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mahabharat 2.44.d60: वहां रत्न, मोती, मूंगा, लाजवर्द, पुखराज, सूर्य पत्थर और शुद्ध क्रिस्टल से बनी वस्तुएं भी देखी गईं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d60
 
 
श्लोक  2.44.d60 
मणिमुक्ताप्रवालानि वैडूर्यविकृतानि च।
अश्मसारानर्कमणीन् विमलान् स्फाटिकानपि॥
 
 
अनुवाद
वहां रत्न, मोती, मूंगा, लाजवर्द, पुखराज, सूर्य पत्थर और शुद्ध क्रिस्टल से बनी वस्तुएं भी देखी गईं।
 
Items made of gems, pearls, corals, lapis lazuli, topaz, sunstone and pure crystal were also seen there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)