Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d6: नरक को भौमासुर भी कहा जाता है क्योंकि भूमिका नरक का पुत्र था। उसने हाथी का रूप धारण किया और प्रजापति त्वष्टा की पुत्री कशारू के पास जाकर उसे बंदी बना लिया। कशारू अत्यंत सुंदर और चौदह वर्ष की थी। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरक को भौमासुर भी कहा जाता है क्योंकि भूमिका नरक का पुत्र था। उसने हाथी का रूप धारण किया और प्रजापति त्वष्टा की पुत्री कशारू के पास जाकर उसे बंदी बना लिया। कशारू अत्यंत सुंदर और चौदह वर्ष की थी।
Naraka is also known as Bhaumasur because Bhumika is the son of Naraka. He assumed the form of an elephant and went to Prajapati Tvashta's daughter Kasharu and captured her. Kasharu was very beautiful and fourteen years old.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥