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mahabharat 2.44.d55: इस बलवान दैत्य ने अपनी शक्ति के अभिमान में समस्त जगत की पूजनीय देवी माता अदिति को भी कष्ट पहुँचाया तथा उनके कुण्डल छीन लिए। इन्हीं सब कारणों से इसका वध हुआ है।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d55
 
 
श्लोक  2.44.d55 
सर्वलोकनमस्कार्यामदितिं बाधते बली॥
कुण्डले दर्पसम्पूर्णस्ततोऽसौ निहतोऽसुर:।
 
 
अनुवाद
इस बलवान दैत्य ने अपनी शक्ति के अभिमान में समस्त जगत की पूजनीय देवी माता अदिति को भी कष्ट पहुँचाया तथा उनके कुण्डल छीन लिए। इन्हीं सब कारणों से इसका वध हुआ है।
 
This powerful demon, being proud of his power, also caused trouble to Aditi, the deity mother who is revered by the entire world, and took away her earrings. Due to all these reasons it has been killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)