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श्लोक 2.44.d53  |
भूमिरुवाच
सृष्टस्त्वयैव मधुहंस्त्वयैव निहत: प्रभो।
यथेच्छसि तथा क्रीडन् प्रजास्तस्यानुपालय॥ |
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| अनुवाद |
| भूमि बोली - प्रभु मधुसूदन! आपने ही इसे जन्म दिया और आपने ही इसका वध किया। अपनी इच्छानुसार लीला करके नरकासुर के बालक का पालन-पोषण कीजिए। |
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| Bhumi said - Prabhu Madhusudan! You gave birth to him and you killed him. Take care of Narakasur's child by performing the leela as per your wish. |
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