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mahabharat 2.44.d52: अपने पुत्र को युद्धभूमि में गिरा हुआ देखकर भूमि ने दोनों कुण्डल अदिति को लौटा दिए और महाबाहु भगवान श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d52
 
 
श्लोक  2.44.d52 
भूमिस्तु पतितं दृष्ट्वा ते वै प्रादाच्च कुण्डले।
प्रदाय च महाबाहुमिदं वचनमब्रवीत्॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र को युद्धभूमि में गिरा हुआ देखकर भूमि ने दोनों कुण्डल अदिति को लौटा दिए और महाबाहु भगवान श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा।
 
Seeing her son fallen in the battlefield, Bhoomi returned both the earrings to Aditi and said thus to the mighty-armed Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)