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mahabharat 2.44.d50: शक्तिशाली मधुसूदन ने हाथ में चक्र लेकर नरकासुर के साथ कुछ देर तक खेला और फिर बलपूर्वक चक्र से उसका सिर काट दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d50
 
 
श्लोक  2.44.d50 
मुहूर्तं लालयित्वाथ नरकं मधुसूदन:।
प्रवृत्तचक्रं चक्रेण प्रममाथ बलाद् बली॥
 
 
अनुवाद
शक्तिशाली मधुसूदन ने हाथ में चक्र लेकर नरकासुर के साथ कुछ देर तक खेला और फिर बलपूर्वक चक्र से उसका सिर काट दिया।
 
The powerful Madhusudana, holding the discus in his hand, toyed with Narakasura for a while and then forcefully cut off his head with the discus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)