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mahabharat 2.44.d49: भारत भूमिपुत्र महादैत्य नरकासुर के साथ जो युद्ध छिड़ा था, वह देवी माँ अदिति के कुण्डलों के लिए बहुत भयंकर था।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d49
 
 
श्लोक  2.44.d49 
तद् युद्धमभवद् घोरं तेन भौमेन भारत।
कुण्डलार्थे सुरेशस्य नरकेण महात्मना॥
 
 
अनुवाद
भारत भूमिपुत्र महादैत्य नरकासुर के साथ जो युद्ध छिड़ा था, वह देवी माँ अदिति के कुण्डलों के लिए बहुत भयंकर था।
 
India The war that broke out with the great demon Narakasura, the son of Bhumi, was very fierce for the earrings of Mother Goddess Aditi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)