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mahabharat 2.44.d47-d48: परंतप युधिष्ठिर! इस प्रकार आठ लाख राक्षसों का वध करके पुरुषसिंह पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण पाताल लोक गए, जहाँ देवताओं के समुदाय को आतंकित करने वाला नरकासुर रहता था। अत्यंत तेजस्वी भगवान मधुसूदन ने मधुकि के समान पराक्रमी नरकासुर के साथ युद्ध आरम्भ किया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d47-d48
 
 
श्लोक  2.44.d47-d48 
अष्टौ शतसहस्राणि दानवानां परंतप।
निहत्य पुरुषव्याघ्र: पातालविवरं ययौ॥
त्रासनं सुरसङ्घानां नरकं पुरुषोत्तम:।
योधयत्यतितेजस्वी मधुवन्मधुसूदन:॥
 
 
अनुवाद
परंतप युधिष्ठिर! इस प्रकार आठ लाख राक्षसों का वध करके पुरुषसिंह पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण पाताल लोक गए, जहाँ देवताओं के समुदाय को आतंकित करने वाला नरकासुर रहता था। अत्यंत तेजस्वी भगवान मधुसूदन ने मधुकि के समान पराक्रमी नरकासुर के साथ युद्ध आरम्भ किया।
 
Parantap Yudhishthir! In this way, after killing eight lakh demons, Purushasingh Purushottam Shri Krishna went to the underworld, where Narakasura, who terrorized the community of gods, lived. Lord Madhusudan, who was extremely brilliant, started the war with Narakasura, who was mighty like Madhuki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)