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mahabharat 2.44.d46: चक्रधारी भगवान कृष्ण से भिड़ने के बाद, सभी राक्षस चक्र से टुकड़े-टुकड़े हो गए और शक्ति और तलवार से घायल होकर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  2.44.d46 
चक्रलाञ्छनसंछिन्ना: शक्तिखड्गहतास्तदा॥
निपेतुर्दानवास्तत्र समासाद्य जनार्दनम्।
 
 
अनुवाद
चक्रधारी भगवान कृष्ण से भिड़ने के बाद, सभी राक्षस चक्र से टुकड़े-टुकड़े हो गए और शक्ति और तलवार से घायल होकर गिर पड़े।
 
After clashing with Lord Krishna who held the Chakra, all the demons were torn to pieces by the Chakra and were injured by the Shakti and the sword and fell down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)