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mahabharat 2.44.d4: उसके बाद नरक नामक एक राक्षस भगवान के कार्य में विघ्न डालने लगा। वह सभी देवताओं को भयभीत करने लगा। राजन! आप तो उसका प्रभाव जानते ही हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  2.44.d4 
स विघ्नमकरोत् तत्र नरको नाम नैर्ऋत:।
त्रासन: सुरसंघानां विदितो व: प्रभावत:॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद नरक नामक एक राक्षस भगवान के कार्य में विघ्न डालने लगा। वह सभी देवताओं को भयभीत करने लगा। राजन! आप तो उसका प्रभाव जानते ही हैं।
 
After that a demon named Naraka started creating obstacles in the work of God. He was terrifying to all the gods. Rajan! You already know its effect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)