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mahabharat 2.44.d38: शत्रुनाशन भगवान श्रीकृष्ण को जाते देख इन्द्र सहित सभी देवता बहुत प्रसन्न हुए और अच्युत भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए उनके पीछे-पीछे चले।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  2.44.d38 
तं प्रयान्तममित्रघ्नं देवा: सहपुरन्दरा:॥
पृष्ठतोऽनुययु: प्रीता: स्तुवन्तो विष्णुमच्युतम्।
 
 
अनुवाद
शत्रुनाशन भगवान श्रीकृष्ण को जाते देख इन्द्र सहित सभी देवता बहुत प्रसन्न हुए और अच्युत भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए उनके पीछे-पीछे चले।
 
Seeing the departure of Shatrunashan Lord Krishna, all the gods including Indra were very happy and followed him praising Achyuta Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)