श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d35
 
 
श्लोक  2.44.d35 
भीष्म उवाच
तमुवाच महाबाहु: प्रीयमाणो जनार्दन:।
निर्जित्य नरकं भौममाहरिष्यामि कुण्डले॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! तब महाबाहु जनार्दन अत्यंत प्रसन्न होकर बोले- 'देवराज! मैं भूमिपुत्र नरकासुर को अवश्य ही परास्त करके अपनी माता के कुण्डल वापस ले आऊँगा।'
 
Bhishmaji says- Yudhishthir! Then the mighty-armed Janardan became very happy and said – 'Devraj! I will definitely defeat Narakasura, the son of Bhoomi, and bring back the earrings of my mother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)