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mahabharat 2.44.d34: मधुसूदन! इस संसार में केवल आप ही माता की आज्ञा सुनने के योग्य हैं। अतः महाभाग नरेश्वर! आप भौमासुर का वध करें।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  2.44.d34 
निदेशशब्दवाच्यस्त्वं लोकेऽस्मिन् मधुसूदन॥
तस्माज्जहि महाभाग भूमिपुत्रं नरेश्वर।
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! इस संसार में केवल आप ही माता की आज्ञा सुनने के योग्य हैं। अतः महाभाग नरेश्वर! आप भौमासुर का वध करें।
 
Madhusudan! In this world, you are the only one worthy of listening to mother's orders. Hence Mahabhag Nareshwar! You kill Bhaumasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)