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mahabharat 2.44.d3: दानव और राक्षस उसके कार्य में बाधा डालने लगे। तब वरदान के नशे में चूर शक्तिशाली कृष्ण ने उन बड़े-बड़े राक्षसों का वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  2.44.d3 
तत्र विघ्नं चरन्ति स्म दैतेया: सह दानवै:।
ताञ्जघान महाबाहु: वरमत्तान् महासुरान्॥
 
 
अनुवाद
दानव और राक्षस उसके कार्य में बाधा डालने लगे। तब वरदान के नशे में चूर शक्तिशाली कृष्ण ने उन बड़े-बड़े राक्षसों का वध कर दिया।
 
Demons and devils started creating obstacles in his work. Then the powerful Krishna, intoxicated by the boon, killed those big demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)