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mahabharat 2.44.d29: इंद्र तुरन्त हाथी से उतरकर भगवान कृष्ण को गले लगा लिया और फिर उसी प्रकार बलराम और राजा उग्रसेन से मिले।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  2.44.d29 
सोऽवतीर्य गजात् तूर्णं परिष्वज्य जनार्दनम्।
सस्वजे बलदेवं च राजानं च तमाहुकम्॥
 
 
अनुवाद
इंद्र तुरन्त हाथी से उतरकर भगवान कृष्ण को गले लगा लिया और फिर उसी प्रकार बलराम और राजा उग्रसेन से मिले।
 
Indra immediately got down from the elephant and embraced Lord Krishna. Then he met Balarama and King Ugrasen in the same manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)