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mahabharat 2.44.d26: उसके बाद, दो घंटे के भीतर, आकाश में हज़ारों सूर्यों के समान एक महान और अद्भुत प्रकाश प्रकट हुआ। वह धीरे-धीरे धरती पर उतरी और वहीं खड़ी हो गई।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d26
 
 
श्लोक  2.44.d26 
तत: सूर्यसहस्राभस्तेजोराशिर्महाद्‍भुत:।
मुहूर्तमन्तरिक्षेऽभूत् ततो भूमौ प्रतिष्ठित:॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद, दो घंटे के भीतर, आकाश में हज़ारों सूर्यों के समान एक महान और अद्भुत प्रकाश प्रकट हुआ। वह धीरे-धीरे धरती पर उतरी और वहीं खड़ी हो गई।
 
After that, within two hours, a great and wonderful light like thousands of suns appeared in the sky. She slowly came down to earth and stood there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)