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mahabharat 2.44.d23: देवपुरी के समान सुन्दर द्वारका नगरी में वृष्णिवंशियों के बैठने के लिए एक सुन्दर भवन है, जो दाशरि नाम से प्रसिद्ध है। इसकी लम्बाई और चौड़ाई एक-एक योजन है।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d23
 
 
श्लोक  2.44.d23 
तस्मिन् देवपुरप्रख्ये सा सभा वृष्ण्युपाश्रया।
या दाशार्हीति विख्याता योजनायतविस्तृता॥
 
 
अनुवाद
देवपुरी के समान सुन्दर द्वारका नगरी में वृष्णिवंशियों के बैठने के लिए एक सुन्दर भवन है, जो दाशरि नाम से प्रसिद्ध है। इसकी लम्बाई और चौड़ाई एक-एक योजन है।
 
In the city of Dwarka which is as beautiful as Devpuri, there is a beautiful hall for the Vrishnivanshis to sit, which is famous by the name of Dasharhi. Its length and breadth are one yojana each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)