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mahabharat 2.44.d21: हे पितामह युधिष्ठिर! इनकी महिमा सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है। आप सभी जानते ही हैं कि इन पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का मुख्य निवास द्वारका है।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d21
 
 
श्लोक  2.44.d21 
तस्यास्य पुरुषेन्द्रस्य लोकप्रथिततेजस:।
निवासो द्वारका तात विदितो व: प्रधानत:॥
 
 
अनुवाद
हे पितामह युधिष्ठिर! इनकी महिमा सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है। आप सभी जानते ही हैं कि इन पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण का मुख्य निवास द्वारका है।
 
Father Yudhishthira! His glory is famous in the entire world. You all know that the main abode of this Purushottam Shri Krishna is Dwarka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)