Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.44.d20: उसका वध करने के लिए चक्र, गदा और तलवार धारण करने वाले इन महाबाहु श्रीकृष्ण ने वृष्णिक कुल में देवकी के गर्भ से जन्म लिया। वसुदेवजी के पुत्र होने के कारण ये जनार्दन 'वसुदेव' कहलाए। | mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद्वधार्थं महाबाहुरेष चक्रगदासिधृक्।
जातो वृष्णिषु देवक्यां वासुदेवो जनार्दन:॥
अनुवाद
उसका वध करने के लिए चक्र, गदा और तलवार धारण करने वाले इन महाबाहु श्रीकृष्ण ने वृष्णिक कुल में देवकी के गर्भ से जन्म लिया। वसुदेवजी के पुत्र होने के कारण ये जनार्दन 'वसुदेव' कहलाए।
To kill him, this great-armed Shri Krishna, who wields discus, mace and sword, was born from the womb of Devaki in Vrishnik family. Being the son of Vasudevji, this Janardan is called ‘Vasudev’.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥