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mahabharat 2.44.d2: कमलनयन श्रीकृष्ण ने द्वारका में राक्षसों को हराकर जो अनेक रत्न और वाहन प्राप्त किए थे, उनकी वे उचित रीति से रक्षा करते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  2.44.d2 
प्रत्यपद्यत यानानि रत्नानि च बहूनि च।
यथार्हं पुण्डरीकाक्षो नैर्ऋतान् प्रतिपालयन्॥
 
 
अनुवाद
कमलनयन श्रीकृष्ण ने द्वारका में राक्षसों को हराकर जो अनेक रत्न और वाहन प्राप्त किए थे, उनकी वे उचित रीति से रक्षा करते थे।
 
Kamalnayan Sri Krishna used to properly protect the many gems and vehicles that he had obtained after defeating the demons in Dvaraka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)