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mahabharat 2.44.d13: उत्साही मन वाले भौमासुर ने उनके रहने के लिए मणि पर्वत पर एक आंतरिक महल बनवाया। उस स्थान का नाम औदक (जलयुक्त भूमि) था। वह आंतरिक महल मुर नामक राक्षस के क्षेत्र में बना था।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d13
 
 
श्लोक  2.44.d13 
तासामन्त:पुरं भौमोऽकारयन्मणिपर्वते।
औदकायामदीनात्मा मुरस्य विषयं प्रति॥
 
 
अनुवाद
उत्साही मन वाले भौमासुर ने उनके रहने के लिए मणि पर्वत पर एक आंतरिक महल बनवाया। उस स्थान का नाम औदक (जलयुक्त भूमि) था। वह आंतरिक महल मुर नामक राक्षस के क्षेत्र में बना था।
 
Bhaumasur, who had an enthusiastic mind, built an inner palace on Mani Parvat for them to live in. The name of that place was Audaka (land blessed with water). That inner palace was built in the territory occupied by a demon named Mur.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)