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mahabharat 2.44.d12: इस प्रकार उसके घर में सोलह हजार एक सौ सुन्दर युवतियाँ एकत्रित हुईं। वे सभी श्रेष्ठ पुरुषों के मार्ग पर चलने वाली, व्रतों और नियमों का पालन करने वाली तथा एक ही चोटी रखने वाली थीं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  2.44.d12 
चतुर्दशसहस्राणां चैकविंशच्छतानि च।
एकवेणीधरा: सर्वा: सतां मार्गमनुव्रता:॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसके घर में सोलह हजार एक सौ सुन्दर युवतियाँ एकत्रित हुईं। वे सभी श्रेष्ठ पुरुषों के मार्ग पर चलने वाली, व्रतों और नियमों का पालन करने वाली तथा एक ही चोटी रखने वाली थीं।
 
In this way, sixteen thousand one hundred beautiful maidens gathered in his house. All of them followed the path of the noble men and were ready to follow the fasts and rules and wore a single braid.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)