श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d115-d116
 
 
श्लोक  2.44.d115-d116 
भीष्म उवाच
विहृत्य सत्यभामा वै सह शच्या सुमध्यमा॥
शच्यापि समनुज्ञाता ययौ कृष्णनिवेशनम्॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! सुन्दरी सत्यभामा शचीदेवी के साथ विहार करके उनकी अनुमति लेकर भगवान श्रीकृष्ण के विश्रामकक्ष में गयीं।
 
Bhishmaji says- Yudhishthira! The beautiful Satyabhama after roaming around with Shachi Devi took her permission and went to the resting room of Lord Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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