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श्लोक 2.44.d115-d116  |
भीष्म उवाच
विहृत्य सत्यभामा वै सह शच्या सुमध्यमा॥
शच्यापि समनुज्ञाता ययौ कृष्णनिवेशनम्॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! सुन्दरी सत्यभामा शचीदेवी के साथ विहार करके उनकी अनुमति लेकर भगवान श्रीकृष्ण के विश्रामकक्ष में गयीं। |
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| Bhishmaji says- Yudhishthira! The beautiful Satyabhama after roaming around with Shachi Devi took her permission and went to the resting room of Lord Krishna. |
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