श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d114
 
 
श्लोक  2.44.d114 
अदितिरुवाच
जरां न यास्यसि वधूर्यावद् वै कृष्णमानुषम्॥
सर्वगन्धगुणोपेता भविष्यसि वरानने।
 
 
अनुवाद
अदिति बोलीं- सुन्दर मुख वाली पुत्रवधू! जब तक श्रीकृष्ण मानव शरीर में रहेंगे, तब तक तुम्हें वृद्धावस्था प्राप्त नहीं होगी तथा तुम सभी प्रकार की दिव्य सुगंधियों और उत्तम गुणों से सुशोभित होती रहोगी।
 
Aditi said – Beautiful faced daughter-in-law! As long as Shri Krishna remains in human body, you will not attain old age and will continue to be adorned with all kinds of divine fragrances and good qualities.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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