vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना
»
श्लोक d113
श्लोक
2.44.d113
सा तस्या: सत्यभामाया: कृष्णप्रियचिकीर्षया॥
वरं प्रादाद् देवमाता सत्यायै विगतज्वरा।
अनुवाद
देवी माँ की सारी चिंताएँ दूर हो गईं। श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने की इच्छा से उन्होंने सत्यभामा को उत्तम वर प्रदान किया।
All the worries of the Mother Goddess had gone away. With the desire to please Shri Krishna, he provided the best groom to Satyabhama.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×