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mahabharat 2.44.d112: उस समय इन्द्र की रानी शची ने भगवान श्री कृष्ण की रानी सत्यभामा का हाथ पकड़कर उन्हें माता अदितिकि की सेवा में ले गईं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d112
 
 
श्लोक  2.44.d112 
शची महेन्द्रमहिषी कृष्णस्य महिषीं तदा॥
सत्यभामां तु संगृह्य अदित्यै वै न्यवेदयत्।
 
 
अनुवाद
उस समय इन्द्र की रानी शची ने भगवान श्री कृष्ण की रानी सत्यभामा का हाथ पकड़कर उन्हें माता अदितिकि की सेवा में ले गईं।
 
At that time, Indra's queen Sachi held the hand of Lord Shri Krishna's queen Satyabhama and took her to the service of Mata Aditiki.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)