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mahabharat 2.44.d110: उस समय भगवान केशव ने बलराम के साथ मिलकर माता अदिति को दिव्य कुण्डल तथा बहुमूल्य रत्न प्रदान किये।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d110
 
 
श्लोक  2.44.d110 
अदिते: कुण्डले दिव्ये ददावथ तदा विभु:॥
रत्नानि च परार्घ्याणि रामेण सह केशव:।
 
 
अनुवाद
उस समय भगवान केशव ने बलराम के साथ मिलकर माता अदिति को दिव्य कुण्डल तथा बहुमूल्य रत्न प्रदान किये।
 
At that time, Lord Keshav along with Balram presented both divine earrings and precious gems to Mother Aditi.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)