Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.44.d109: इंद्र भवन के निकट पहुँचकर भगवान जनार्दन गरुड़ से उतरे। वहाँ उन्होंने देवमाता अदिति के चरणों में प्रणाम किया। फिर ब्रह्मा, दक्ष, अन्य प्रजापतियों और सभी देवताओं ने उनका स्वागत किया।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d109
 
 
श्लोक  2.44.d109 
शक्रसद्म समासाद्य चावरुह्य जनार्दन:।
सोऽभिवाद्यादिते: पादावर्चित: सर्वदैवतै:॥
ब्रह्मदक्षपुरोगैश्च प्रजापतिभिरेव च।
 
 
अनुवाद
इंद्र भवन के निकट पहुँचकर भगवान जनार्दन गरुड़ से उतरे। वहाँ उन्होंने देवमाता अदिति के चरणों में प्रणाम किया। फिर ब्रह्मा, दक्ष, अन्य प्रजापतियों और सभी देवताओं ने उनका स्वागत किया।
 
Lord Janardan descended from Garuda after reaching near Indra Bhawan. There he bowed down at the feet of Devmata Aditi. Then Brahma and Daksha and other Prajapatis and all the Gods welcomed him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)