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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d107-d108
 
 
श्लोक  2.44.d107-d108 
विश्वेषां मरुतां चैव साध्यानां च युधिष्ठिर॥
भ्राजमानान्यतिक्रम्य अश्विनोश्च परंतप।
प्राप्य पुण्यतमं स्थानं देवलोकमरिंदम:॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! वे विश्वेदेवों, मरुद्गणों और साध्यों के उज्ज्वल स्थानों को पार करके अश्विनीकुमारों के परम पवित्र लोक में प्रवेश कर गए। परंतप! तत्पश्चात् शत्रुओं का नाश करने वाले भगवान श्रीकृष्ण स्वर्गलोक में पहुँचे।
 
Yudhisthira! He crossed the bright places of Vishvedevas, Marudganas and Sadhyas and entered the most pious world of Ashwinikumars. Parantap! After that, Lord Krishna, the destroyer of enemies, reached the heavenly abode.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)