Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.44.d106: भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात मधुसूदन मेरु पर्वत के मध्य शिखर पर पहुँचे और उन्होंने समस्त देवताओं के निवासस्थान देखे।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d106
 
 
श्लोक  2.44.d106 
मेरो: शिखरमासाद्य मध्यमं मधुसूदन:॥
देवस्थानानि सर्वाणि ददर्श भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात मधुसूदन मेरु पर्वत के मध्य शिखर पर पहुँचे और उन्होंने समस्त देवताओं के निवासस्थान देखे।
 
Bharatshrestha! Thereafter Madhusudan reached the middle peak of Mount Meru and saw the abodes of all the gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)