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mahabharat 2.44.d105: वह अपने तेज से ग्रहों, नक्षत्रों, तारों और सप्तऋषियों के प्रकाश को नष्ट करते हुए चंद्रमा और सूर्य के मार्ग पर पहुंच गए।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d105
 
 
श्लोक  2.44.d105 
ग्रहनक्षत्रताराणां सप्तर्षीणां स्वतेजसा॥
प्रभाजालमतिक्रम्य चन्द्रसूर्यपथं ययौ।
 
 
अनुवाद
वह अपने तेज से ग्रहों, नक्षत्रों, तारों और सप्तऋषियों के प्रकाश को नष्ट करते हुए चंद्रमा और सूर्य के मार्ग पर पहुंच गए।
 
He reached the path of the Moon and the Sun with his brilliance, obliterating the planets, constellations, stars and the light of the Saptarishis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)