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mahabharat 2.44.d1: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण समस्त यदुवंशियों को प्रसन्न करके शूरसेनपुरी मथुरा छोड़कर द्वारका चले गये।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.44.d1 
भीष्म उवाच
शूरसेनपुरं त्यक्त्वा सर्वयादवनन्दन:।
द्वारकां भगवान् कृष्ण: प्रत्यपद्यत केशव:॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण समस्त यदुवंशियों को प्रसन्न करके शूरसेनपुरी मथुरा छोड़कर द्वारका चले गये।
 
Bhishmaji says- Yudhishthir! Thereafter, Lord Krishna, who made all the Yaduvanshis happy, left Shurasenpuri Mathura and went to Dwarka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)