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mahabharat 2.43.d65: योद्धाओं के दौड़ने या बोलने से उत्पन्न ध्वनि उस भयानक युद्ध-नदी की कलकल ध्वनि थी। युधिष्ठिर! भगवान नारायण के अलावा कंस को कौन मार सकता था?   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d65
 
 
श्लोक  2.43.d65 
महामृधनदीं घोरां योधावर्तननि:स्वनाम्॥
को वा नारायणादन्य: कंसहन्ता युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
योद्धाओं के दौड़ने या बोलने से उत्पन्न ध्वनि उस भयानक युद्ध-नदी की कलकल ध्वनि थी। युधिष्ठिर! भगवान नारायण के अलावा कंस को कौन मार सकता था?
 
The sound produced by the warriors running around or talking was the gurgling sound of that terrifying war-river. Yudhishthira! Who could have killed Kansa except Lord Narayana?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)