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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d63
 
 
श्लोक  2.43.d63 
शस्त्रजालमहाफेनां सादिवेगमहाजलाम्॥
गदापरिघपाठीनां नानाकवचशैवलाम्।
 
 
अनुवाद
अस्त्र-शस्त्रों के समूह से उसमें झाग का भ्रम उत्पन्न हो रहा था। सवारों की गति उसमें प्रचण्ड जलधारा के समान प्रतीत हो रही थी। गदा और परिघ, पथिन् नामक मछलियों के समान प्रतीत हो रहे थे। नाना प्रकार के कवच नालियों के समान थे।
 
The masses of weapons created the illusion of foam in it. The speed of the riders appeared like a great water current in it. The mace and the parigha appeared like fishes called pathin. Various types of armour were like sewars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)