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mahabharat 2.43.d61: युधिष्ठिर! कंस के पास घोड़ों का एक और बहुत बड़ा समूह था, जिसमें सभी रंगों के घोड़े थे। उस समूह का नाम मिश्रक था। मिश्रकों की संख्या साठ हज़ार बताई जाती है।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d61
 
 
श्लोक  2.43.d61 
य आसन् सर्ववर्णास्तु हयास्तस्य युधिष्ठिर॥
स गणो मिश्रको नाम षष्टिसाहस्र उच्यते।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! कंस के पास घोड़ों का एक और बहुत बड़ा समूह था, जिसमें सभी रंगों के घोड़े थे। उस समूह का नाम मिश्रक था। मिश्रकों की संख्या साठ हज़ार बताई जाती है।
 
Yudhishthira! Kansa had another very large group of horses, which had horses of all colours. The name of that group was Mishrak. The number of Mishraks is said to be sixty thousand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)