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mahabharat 2.43.d46: उस असम्भव, अकल्पनीय और अत्यन्त अद्भुत कार्य को देखकर समस्त प्राणी अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d46
 
 
श्लोक  2.43.d46 
तदशक्यमचिन्त्यं च दृष्ट्वा सुमहदद्‍भुतम्॥
सर्वेषामेव भूतानां विस्मय: समजायत।
 
 
अनुवाद
उस असम्भव, अकल्पनीय और अत्यन्त अद्भुत कार्य को देखकर समस्त प्राणी अत्यन्त आश्चर्यचकित हुए।
 
Seeing that impossible, unimaginable and extremely wonderful task, all the creatures were very surprised.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)