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mahabharat 2.43.d45: तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सांदीपनि का पुत्र, जो बहुत समय तक यमलोक में रहा था, अपने पूर्व शरीर सहित जीवित हो गया।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d45
 
 
श्लोक  2.43.d45 
तत: सान्दीपने: पुत्र: प्रसादादमितौजस:॥
दीर्घकालं गत: प्रेतं पुनरासीच्छरीरवान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से सांदीपनि का पुत्र, जो बहुत समय तक यमलोक में रहा था, अपने पूर्व शरीर सहित जीवित हो गया।
 
Thereafter, by the grace of Lord Krishna, the son of Sandipani, who had gone to Yamaloka for a long time, came back to life with his previous body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)