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mahabharat 2.43.d40: पचास दिन और रातों में ही उन दोनों ने दस भागों वाले सम्पूर्ण धनुर्वेद का ज्ञान प्राप्त कर लिया, जो सुप्रतिष्ठित और रहस्यों से भरा हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d40
 
 
श्लोक  2.43.d40 
पञ्चाशद्भिरहोरात्रैर्दशाङ्गं सुप्रतिष्ठितम्॥
सरहस्यं धनुर्वेदं सकलं ताववापतु:।
 
 
अनुवाद
पचास दिन और रातों में ही उन दोनों ने दस भागों वाले सम्पूर्ण धनुर्वेद का ज्ञान प्राप्त कर लिया, जो सुप्रतिष्ठित और रहस्यों से भरा हुआ था।
 
Within fifty days and nights both of them acquired the knowledge of the complete Dhanurveda consisting of ten parts, well-established and full of secrets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)