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mahabharat 2.43.d38: उन्होंने केवल बारह दिनों में हाथी और घोड़ों की शिक्षा प्राप्त कर ली। इसके बाद, दोनों धर्मात्मा योद्धा पुनः धनुर्वेद सीखने के लिए ऋषि सांदीपनि के पास गए।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  2.43.d38 
हस्तिशिक्षामश्वशिक्षां द्वादशाहेन चापतु:।
तावुभौ जग्मतुर्वीरौ गुरुं सान्दीपनिं पुन:॥
धनुर्वेदचिकीर्षार्थं धर्मज्ञौ धर्मचारिणौ।
 
 
अनुवाद
उन्होंने केवल बारह दिनों में हाथी और घोड़ों की शिक्षा प्राप्त कर ली। इसके बाद, दोनों धर्मात्मा योद्धा पुनः धनुर्वेद सीखने के लिए ऋषि सांदीपनि के पास गए।
 
They acquired the education of elephants and horses in just twelve days. After this, both the religious and religious warriors again went to Sage Sandipani to learn Dhanurveda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)