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mahabharat 2.43.d32: हाथियों में श्रेष्ठ कुवलयापीड़, जो ऐरावत कुल में उत्पन्न हुआ था और श्री कृष्ण को कुचलना चाहता था, उसे कंस के सामने ही श्री कृष्ण ने मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d32
 
 
श्लोक  2.43.d32 
ऐरावतं युयुत्सन्तं मातङ्गानामिवर्षभम्।
कृष्ण: कुवलयापीडं हतवांस्तस्य पश्यत:॥
 
 
अनुवाद
हाथियों में श्रेष्ठ कुवलयापीड़, जो ऐरावत कुल में उत्पन्न हुआ था और श्री कृष्ण को कुचलना चाहता था, उसे कंस के सामने ही श्री कृष्ण ने मार डाला।
 
Kuvalayapeed, the best among elephants, who was born in the Airavat clan and wanted to crush Shri Krishna, was killed by Shri Krishna in front of Kansa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)