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श्लोक 2.43.d23  |
धृतो गोवर्धनो नाम सप्ताहं पर्वतस्तदा॥
शिशुना वासुदेवेन गवार्थमरिमर्दन। |
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| अनुवाद |
| शत्रुमर्दन युधिष्ठिर! (जब इंद्र वर्षा कर रहे थे) तब बालक वसुदेव ने गायों की रक्षा के लिए एक सप्ताह तक गोवर्धन पर्वत को अपने हाथ पर उठा रखा था। |
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| Shatrumardan Yudhishthir! (When Indra was raining) the child Vasudev had lifted the Govardhan mountain on his hand for a week to protect the cows. |
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