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mahabharat 2.43.d10-d11: भण्डियार वन में रहने वाले अनेक ग्वाले वहाँ सुन्दर-सुन्दर खिलौनों से खेलकर श्रीकृष्ण को प्रसन्न रखते थे। अन्य प्रसन्नचित्त गोप, जो वन में विचरण करते थे, सदैव श्रीकृष्ण की महिमा का गान करते रहते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 43: कालियमर्दन एवं धेनुकासुर, अरिष्टासुर और कंस आदिका वध, श्रीकृष्ण और बलरामका विद्याभ्यास तथा गुरुदक्षिणारूपसे गुरुजीको उनके मरे हुए पुत्रको जीवित करके देना  »  श्लोक d10-d11
 
 
श्लोक  2.43.d10-d11 
तं क्रीडमानं गोपाला: कृष्णं भाण्डीरवासिन:।
रमयन्ति स्म बहवो मान्यै: क्रीडनकैस्तदा॥
अन्ये स्म परिगायन्ति गोपा मुदितमानसा:।
गोपाला: कृष्णमेवान्ये गायन्ति स्म वनप्रिया:॥
 
 
अनुवाद
भण्डियार वन में रहने वाले अनेक ग्वाले वहाँ सुन्दर-सुन्दर खिलौनों से खेलकर श्रीकृष्ण को प्रसन्न रखते थे। अन्य प्रसन्नचित्त गोप, जो वन में विचरण करते थे, सदैव श्रीकृष्ण की महिमा का गान करते रहते थे।
 
Many cowherds residing in Bhandiar forest used to keep Shri Krishna happy by playing there with nice toys. Other happy gopas, who loved to roam in the forest, always used to sing the glories of Shri Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)