श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  2.42.d9 
सागरा: समकम्पन्त मुदा चेलुश्च पर्वता:।
जज्वलुश्चाग्नय: शान्ता जायमाने जनार्दने॥
 
 
अनुवाद
भगवान के जन्म के समय हर्ष के आवेश से समुद्र में लहरें उठने लगीं, पर्वत हिलने लगे और बुझी हुई अग्नियाँ भी अचानक प्रज्वलित होने लगीं।
 
At the time of Lord's birth, due to the excitement of joy, waves started rising in the ocean, mountains started shaking and even the extinguished fires suddenly started igniting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)