श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  2.42.d6 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्ततो भीष्म: केशवस्य महात्मन:।
माधवेषु तदा जन्म कथयामास वीर्यवान्॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! राजा युधिष्ठिर के इस प्रकार पूछने पर महाबली भीष्म ने मधुवंश में भगवान केशव के अवतार की कथा सुनानी आरम्भ की।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On being asked in this manner by King Yudhishthira, the mighty Bhishma began narrating the story of Lord Keshav's incarnation in the Madhuvansh.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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