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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन
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श्लोक d36
श्लोक
2.42.d36
क्वचिद् वसन्तावन्योन्यं क्रीडमानौ क्वचिद् वने।
पर्णशय्यासु संसुप्तौ क्वचिन्निद्रान्तरैषिणौ॥
अनुवाद
दोनों भाई कहीं रुककर जंगल में एक-दूसरे के साथ खेलते और कहीं पत्तों का बिस्तर बिछाकर सो जाते।
Both the brothers would stop somewhere, play with each other in the forest and somewhere they would spread a bed of leaves and sleep.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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