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mahabharat 2.42.d34: वे कानों में मोर पंख लगाए, सिर पर पत्तों का मुकुट पहने और गले में वन पुष्पों की माला डाले हुए थे। उस समय वे दोनों शाल वृक्ष के नए पौधों के समान अत्यंत सुंदर प्रतीत होते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d34
 
 
श्लोक  2.42.d34 
मयूराङ्गजकर्णौ तौ पल्लवापीडधारिणौ।
वनमालापरिक्षिप्तौ सालपोताविवोद्‍गतौ॥
 
 
अनुवाद
वे कानों में मोर पंख लगाए, सिर पर पत्तों का मुकुट पहने और गले में वन पुष्पों की माला डाले हुए थे। उस समय वे दोनों शाल वृक्ष के नए पौधों के समान अत्यंत सुंदर प्रतीत होते थे।
 
They used to put peacock feathers in their ears, wear crowns of leaves on their heads and put garlands of forest flowers around their necks. At that time, both of them looked very beautiful like new plants of the Shaal tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)