श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d28
 
 
श्लोक  2.42.d28 
तत: स बालो गोविन्दो नवनीतं तदा क्षये।
ग्रसमानस्तु तत्रायं गोपीभिर्ददृशेऽथ वै॥
 
 
अनुवाद
एक दिन बालक श्रीकृष्ण एकांत घर में छिपकर माखन खा रहे थे, तभी कुछ गोपियों ने उन्हें वहाँ देख लिया।
 
One day, the child Shri Krishna was eating butter while hiding in a solitary house. At that time, some gopis saw him there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)