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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  2.42.d14 
उपतस्थे च गोविन्दं सहस्राक्ष: शचीपति:।
अभ्यभाषत तेजस्वी महर्षीन् पूजयंस्तदा॥
 
 
अनुवाद
उस समय सहस्र नेत्रों वाले तेजस्वी इन्द्र शचीवल्लभ भगवान गोविन्द की सेवा में उपस्थित हुए और महर्षियों का आदर करते हुए बोले।
 
At that time, the thousand-eyed Shachivallabh, the brilliant Indra, appeared in the service of Lord Govind and spoke respecting the great sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)