श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 42: श्रीकृष्णका प्राकटॺ तथा श्रीकृष्ण-बलरामकी बाललीलाओंका वर्णन  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  2.42.d11 
देवदुन्दुभयश्चापि सस्वनुर्भृशमम्बरे।
अभ्यवर्षंस्तदाऽऽगम्य देवता: पुष्पवृष्टिभि:॥
 
 
अनुवाद
आकाश में नगाड़े जोर-जोर से बजने लगे और देवतागण वहाँ आकर पुष्प वर्षा करने लगे।
 
The drums of heaven started playing loudly in the sky and the gods started coming and showering flowers there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)