| श्री महाभारत » पर्व 2: सभा पर्व » अध्याय 41: कल्क्यवतार: » श्लोक d1-d2 |
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| | | | श्लोक 2.41.d1-d2  | कल्की विष्णुयशा नाम भूयश्चोत्पत्स्यते हरि:।
कलेर्युगान्ते सम्प्राप्ते धर्मे शिथिलतां गते॥
पाखण्डिनां गणानां हि वधार्थं भरतर्षभ:।
धर्मस्य च विवृद्धॺर्थं विप्राणां हितकाम्यया॥ | | | | | | अनुवाद | | कलियुग के अंत में जब धर्म क्षीण हो जाएगा, तब पाखण्डियों का संहार करने, धर्म की वृद्धि और ब्राह्मणों के कल्याण के लिए भगवान श्रीहरि पुनः अवतार लेंगे। उनके उस अवतार का नाम 'कल्कि विष्णुयशा' होगा। | | | | At the end of Kaliyuga, when Dharma will weaken, Lord Shri Hari will incarnate again to kill the hypocrites and for the growth of Dharma and for the welfare of Brahmins. The name of that incarnation of his will be 'Kalki Vishnuyasha'. | |
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